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कोविड-19


कोविड-19

कोविड -19 महामारी ने दुनिया भर में मानव जीवन को प्रभावकारी हानि पहुंचाई है और जन स्वास्थ्य, खाद्य प्रणालियों और आजीविका हेतु अभूतपूर्व चुनौतियां प्रस्तुत कर दी हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड -19 को अंतरराष्ट्रीय गंभीर जन-स्वास्थ्य आपातकाल दिया है और 11 मार्च 2020 को इसे एक महामारी घोषित कर दिया। कोविड - 19 के प्रकोप ने भारत भी उसी अवधि में आतंकित किया और देशव्यापी तालाबंदी की घोषणा करके तत्काल, आवश्यक कार्रवाई की गई। महामारी से उत्पन्न आर्थिक और सामाजिक व्यवधान विनाशकारी हैं और महत्वपूर्ण संख्या में लोगों के अत्यधिक गरीब हो जाने का खतरा है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रदान किए गए सभी दिशानिर्देशों और प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए महामारी के दौरान भारत की जनजातीय आबादी की सुरक्षा और भलाई के लिए प्रतिबद्ध है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कोविड - 19 के बारे में जागरूकता फैलाने, जनजातीय लोगों की आवश्यक चिकित्सा सेवाओं और थर्मल स्क्रीनिंग तक पहुंच में सुधार के लिए स्वास्थ्य संबंधी अपने योगदान पर ध्यान केंद्रित किया है। विभिन्न क्षेत्रों में मास्क, साबुन, पीपीई किट जैसी आवश्यक वस्तुएं अग्रिम पंक्ति के श्रमिकों को वितरित की गई हैं। विभिन्न स्थलों पर मोबाइल मेडिकल यूनिट और अन्य चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।

आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत, समुदाय के सदस्यों के सहयोग और उनके स्थानीय चिकित्सीय पौधों के बारे में ज्ञान का उपयोग करते हुए आयुष मंत्रालय के सहयोग से औषधीय वनस्पति क्षेत्र विकसित किये गये हैं।

मंत्रालय ने वन उपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को संशोधित करके, एमएसपी सूची में 23 नई वस्तुओं को जोड़ते हुए, 1126 वन धन विकास केंद्रों को मंजूरी देकर, वन धन योजना के अंतर्गत 3.6 लाख जनजातीय व्यक्तियों को रोजगार के अवसर प्रदान करके और ग्राम उद्यमों की स्थापना के लिए वित्तीय, क्षमता और सलाहकार सहायता का प्रावधान करके महामारी के दौरान आर्थिक सहायता हेतु अपने योगदान में वृद्धि की है।

जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातीय वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), अपने संस्थागत ढांचे के माध्यम से, जनजातियों को स्वरोजगार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है और 55,000 जनजातीय व्यक्तियों के लिए ग्राम उद्यम / स्व-रोजगार की स्थापना के लिए मांग आधारित वित्तीय सहायता, क्षमता और परामर्शी सेवाओं की प्रदायगी सुनिश्चित करता है।