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एनजीओ-आदिम जनजातीय समूह के विकास की योजना (पीटीजीएस)

आदिम जनजातीय समूह का विकास (पीटीजी)

उद्देश्य

आज भी कुछ ऐसे आदिवासी समुदाय मौजूद है जिनकी साक्षरता दर कम, घटती या स्थिर आबादि, कृषि की पुरानी तकनीक तथा जो आर्थिक रूप से पिछड़ रहे है। 15 राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में से 75 ऐसे समुदायों की आदिम जनजाति समूह रूप में पहचान की गई है। राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की पीटीजी की सूची अनुलग्नक I में दी गई है। इस समूहों में से कुछ समुदाय बहुत ही छोटे है, जो दूरदराज के निवास स्थान पर अपर्याप्त प्रशासन एंव पिछड़ी मूलभूत सुविधाओं के साथ विभिन्न रूपो में विकसित हुए है। इसलिए उन्हें संरक्षण एंव विकास हेतु प्राथमिकता दी जाने की आवश्यकता है।

इन समूहों की परेशानियां एंव जरूरतें अन्य अनुसूचित जनजातियों से भिन्न होती है। आदिवासी समूहों के बीच आदिम जनजाति समूह सबसे कमजोर होने के कारण, राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों ने इन समूहों के सामाजिक-आर्थिक विकास हेतु केंद्रीय क्षेत्र/केन्द्र प्रायोजित एंव राज्य योजना स्कीमों से अपेक्षित धनराशि के आवंटन हेतु अनुरोध किया है। तथापि, कुछ बहुत महत्वपूर्ण अंश/गतिविधियों पीजीटी के विकास, सुरक्षा एंव जीविका हेतु बहुत महत्वपूर्ण योजना मौजूद है, जो विशेष रूप से किसी भी मौजूदा योजना में शामिल नहीं है, इस योजना के तहत कोष इन गतिविधियों हेतु प्रयोग में लाया जाता है।

कार्य-क्षेत्र

इस केंद्रीय क्षेत्र की योजना के तहत आदिम जनजाति समूह के विकास हेतु कोष केवल उन अंश/गतिविधियों को उपलब्ध कराया जाएगा जो आदिम जनजाति समूह (पीजीटी) के विकास, सुरक्षा एंव जीविका हेतु बहुत महत्वपूर्ण है और जो विशेष रूप से किसी भी मौजूदा योजना में शामिल नहीं है, तथा उन्हें राज्य या केंद्र या जनजातीय उपयोजना हेतु विशेष केंद्रीय सहायता के तहत गवर्निंग दिशानिर्देश तथा संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत कोष दिया जाएगा। ऐसी अंश/गतिविधियां जो कि प्रत्येक राज्यों में भिन्न हो एंव राज्य में ही अलग-अलग परियोजनाओं में भिन्न हो, केन्द्रीय स्तर पर विस्तृत रूप से नहीं पहचानी जा सकती। हांलाकि, इस योजना के तहत फंड का इस्तेमाल ऐसी परियोजना, जो विभिन्न तरह के शोषण के खिलाफ उनकी रक्षा करने एंव उनके अस्तित्व पर अत्यधिक प्रतिकूल दबाव का सामना करने से बचाने हेतु, आदि के लाभार्थियों की मदद करना है, जिससे उन्हें ऐसी स्थिति में लाया जा सके जहां वे मांग कर सके तथा विशेष सेवाओं एंव परिसंपत्तियों को प्राप्त कर सके। इस योजना के तहत गतिविधियों में निम्न उपाय शामिल है जैसे- पीढ़ी को जागरूक करना एंव विश्वास निर्माण, स्व-सहायता समूहों संस्थानों के आदिवासी युवाओं हेतु कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण, सेवा/निवेश के प्रावधान आदि जो मैजूदा किसी भी योजना में शामिल न हो। इस योजना के लाभार्थियों के संदर्भ में पीटीजी के ही सदस्यों को ही शामिल किया जाएगा।

क्रियान्वयन एजेंसियों

क्षमता एंव तत्परता रखने वाली एकीकृत आदिवासी विकास परियोजनाएं (आईटीडीपी)/ एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसियां (आईटीडीए), आदिवासी शोध संस्थान (टीआरआई) एंव गैर-सरकारी संगठन के माध्यम से ही योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। गैर-सरकारी संगठनों के चयन सहित योजना के उचित निष्पादन, क्रियान्वयन, देखरेख एवं समन्वय हेतु संबंधित राज्य सरकार जिम्मेदार होगी। अनुलग्नक II में निर्धारित प्रोफार्मा में ही आईटीडीपी/आईटीडीए एंव टीआरआई को अपने प्रस्ताव भेजने चाहिए। एनजीओ को अनुलग्नक IV एंव अनुलग्नक V के अनुसार ही राज्य सरकार/ संघ राज्य क्षेत्र की सिफारिश के साथ प्रोफार्मा II में अपने प्रस्ताव भेजने चाहिए।

निधीकरण की पद्धति

यह केंद्रीय क्षेत्र की योजना है, इसलिए वित्तिय सहायता 100% आधार पर उपलब्ध है। क्रियान्वयन एजेंसियों की अनुदान सहायता की अधिकतम अवधि 3 वर्ष की होगी।

कार्य-निष्पादन की समीक्षा

क्रियान्वयन एजेंसियों द्वारा इस योजना के तहत चयन समिति परियोजनाओं/गतिविधियों के कार्य-निष्पादन की समीक्षा प्रारंभिक तौर पर करेंगे।

चयन समिति

आईटीडीपीएस/आईटीडीए, टीआरआई एंव एनजीओ से प्राप्त प्रस्ताव निम्न समिति द्वारा मिलकर स्वीकृत किए जाऐंगे।:-

1. संयुक्त सचिव एम/ओ. जनजातीय कार्य सभापति
2. निदेशक/डिप्टी सचिव एम/ओ. जनजातीय कार्य (आईएफ) सदस्य
3. डिप्टी सलाहकार योजना आयोग (बीसी) सदस्य
4. निदेशक एससी/एसटी हेतु राष्ट्रीय आयोग सदस्य
5. निदेशक एम/ओ. जनजातीय कार्य सदस्य

अध्यक्ष किसी अन्य अधिकारी (एस) को सदस्य (एस) एंव आवश्यकतानुसार सह-विकल्प तौर पर चुन सकता है।

नियम एवं शर्तें

i. योजना के तहत प्रदान वित्तिय सहायता का उपयोग स्वीकृत उद्देश्य एंव आदिम जनजाति समूह (पीटीजी) के सदस्यों के कल्याण हेतु ही प्रयोग में लाया जाना चाहिए।

ii. राज्य सरकार की सहमति पर ही आईटीडीपी/आईटीडीए एंव टीआरआई को दिया गया वित्तीय समर्थन माना जाएगा एंव राज्य/संघ राज्य क्षेत्र के सहायता अनुदान के नियम एंव नियमन नियन्त्रक उन पर लागू करने होगें।

iii. कार्यान्वयन ऐजंसी को राज्य सरकार के इस मंत्रालय की योजना के वास्तविक काम के प्रभाव का प्रतिनिधि बनने की अनुमति होगी।

iv. अनुदान ग्राही संस्था अनुदान का उपयोग किसी भी पक्षपातपूर्ण, राजनैतिक या सरकार विरोधी प्रचार हेतु नहीं करेगी। यदि सरकार इस बात से संतुष्ट हो जाती है कि अनुदानग्राही संगठन ने इस पैरा का उल्लंघन किया है तो भविष्य में अनुदान रोक दिया जाएगा, उस संगठन को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा तथा दिए गए अनुदान को ब्याज सहित वसूला जाएगा।

v. प्रत्येक वित्तिय वर्ष के समाप्त होने के बाद संस्था को तुरंत उपयोग प्रमाणपत्र तथा प्रमाणित विधिवत व्यय के लेखा परीक्षा आंकड़े पंजीकृत चार्टर्ड एकाउंटेंट द्वारा प्रस्तुत कराने होगें, जिसमें निम्न शामिल है:

a) रसीद सहित आय एंव व्यय की खाता/बैलेंस शीट, वर्ष के दैरान जनजातीय मंत्रालय द्वारा दिए गए अनुदान के संबंध में संस्था का भुगतान खाता तथा उपयोगिता प्रमाणपत्र।

b) सरकार के अन्य किसी विभाग/मंत्रालय द्वारा समान उद्देश्य हेतु संस्थान को अनुदान नहीं प्राप्त हुआ हो, के प्रभाव का प्रमाण पत्र।


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