भूमिका

भारतीय का संविधान अनुसूचित जनजातियों के रुप में परिभाषित नहीं करता है। अनुच्छेद 366(25) उन समुदायों को अनुसूचित जनजातियां मानता है जो संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार अनुसूचित हैं। संविधान के अनुच्छेद 342 के अनुसार, अनुसूचित जनजाति में वे जनजातियां, जनजाति समूह या इस समूह के वह भाग आते हैं जिन्हें राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक सूचना के माध्यम से ऐसा घोषित किया गया है। 1991 जनगणना के अनुसार, अनुसूचित जनजातियां देश की 8.08 प्रतिशत यानि 67.76 मिलियन आबादी है। अनुसूचित जनजातियां देश में खासकर वनों एवं पहाड़ी क्षेत्रों में बसी हुई हैं।

 

इन समुदायों की आवश्यक विशेषताएं ये हैं:-

आदिम लक्षण

भौगोलिक अलगाव

विशिष्ट संस्कृति

बड़े पैमाने पर समुदाय के साथ संपर्क में संकोच

आर्थिक रूप से पिछड़ापन

1991 जनगणना आंकड़ों के अनुसार 42.02 प्रतिशत अनुसूचित जनजातियां मुख्य कामगार थीं, जिनमें से 54.50 प्रतिशत किसान तथा 32.69 प्रतिशत खेतिहर मजदूर थे। इस प्रकार, इन समुदायों में से लगभग 87 प्रतिशत मुख्य कामगर, प्राथमिक क्षेत्र की गतिविधियों में संलग्न थे। अनुसूचित जनजातियों की साक्षरता 52 प्रतिशत औसत राष्ट्रीय की तुलना में 29.60 प्रतिशत के आसपास थी। तीन-चौथाई से अधिक अनुसूचित जनजाति की महिलाएं निरक्षर थीं। यह असमानता औपचारिक शिक्षा के दौरान स्कूल छोड़ने की वजह से है जिसके परिणाम स्वरूप उच्च शिक्षा में कम प्रतिनिधित्व है। आश्चर्यजनक नहीं है कि इसका कुल प्रभाव यह है कि गरीबी रेखा से नीचे अनुसूचित जनजातियों का अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है। वर्ष 1993-94 हेतु योजना आयोग द्वारा लगाया गया गरीबी का अनुमान यह दर्शाता है कि 51.92 प्रतिशत ग्रामीण तथा 41.4 प्रतिशत शहरी अनुसूचित जनजातियां गरीबी रेखा से नीचे रह रही हैं।

 

भारतीय संविधान में अनुसूचित जनजाति की शिक्षा एवं आर्थिक हित को बढ़ावा देने तथा सामाजिक अन्याय एवं सभी प्रकार के शोषण से उनकी सुरक्षा के लिए कई विशेष प्रावधान शामिल किए गए हैं। इन उद्देश्यों की पूर्ति जनजातीय उप-योजना नामक रणनीति द्वारा है, जिसे पांचवी पंचवर्षीय योजना की शुरुआत में अपनाया गया था। यह रणनीति जनजातियों के विकास हेतु राज्य योजना आवंटनों, केंन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों, वित्तीय एवं विकासात्मक संस्थाओं की योजनाओं/कार्यक्रमों द्वारा निधियों के पर्याप्त प्रवाह को सुनिश्चित करती है। इस रणनीति का मुख्य आधार उन राज्य/संघ राज्य क्षेत्र में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात में राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा टीएसपी हेतु निधियों को तय कर सुनिश्चित करना है। अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए जनजातीय उप-योजना तैयार करने और इसे कार्यान्वयन करने से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों तथा केंद्रीय मंत्रालय/विभागों के प्रयासों के अलावा जनजातीय कार्य मंत्रालय अनुसूचित जनजातियों को लाभ पहुंचाने हेतु कई योजनाएं एवं कार्यक्रम कार्यान्वित कर रहा है। साक्षरता के क्षेत्र में प्रगति दर को निम्नलिखित तालिका में देखा जा सकता है:-

 

 

  1961 1971 1981 1991 2001
कुल साक्षर जनसंख्या 24 % 29.4 % 36.2 % 52.2 % 64.84%
अनुसूचित जनजातियों (एसटी) की जनसंख्या 8.5 % 11.3 % 16.3 % 29.6 % 47.10%
कुल महिला जनसंख्या 12.9 % 18.6 % 29.8 % 39.3 % 53.67%
कुल अनुसूचित जनजातियों (एसटी) की महिला जनसंख्या 3.2 % 4.8 % 8.0 % 18.2 % 34.76%

 

देश में कुल आबादी की 50 प्रतिशत अधिक की अनुसूचित जनजाति की आबादी वाले ब्लॉक या ब्लॉक के समूहों के लिए अब 194 एकीकृत जनजातीय विकास परियोजनाएं (आईटीडीपी) मौजूद हैं। छठी योजना के दौरान, आईटीडीपी क्षेत्रों के बाहरी इलाकों जहां 10,000 की कुल आबादी में से 5,000 अनसूचित जनजाति को जनजाति उप-योजना में संशोधित क्षेत्र विकास दृष्टिकोण (माडा) के तहत कवर किया गया था। अब तक देश में 252 माडा इलाकों की पहचान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, कुल 5,000 आबादी वाले 79 इलाकों की पहचान की गई है जिसमें 50 प्रतिशत जनजातियां हैं।

अनुसूचित जनजातियों के विकास पर औऱ अधिक ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य हेतु अक्टूबर 1999 को एक अलग मंत्रालय बनाया गया, जिसे जनजातीय मंत्रालय के नाम से जाना जाता है। यह नया मंत्रालय, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय में से बनाया गया है, जो कि अनुसूचित जनजातियों के विकास हेतु सभी नीति, आयोजना एंव कार्यक्रमों तथा योजनाओं के समन्वय के लिए नोडल मंत्रालय है।

मंत्रालय के अधिदेश में अनुसूचित जनजातियों हेतु सामाजिक सुरक्षा एवं सामाजिक बीमा, जनजातीय कल्याण आयोजना, परियोजना निरूपण, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, जनजाति कल्याण हेतु स्वैच्छिक प्रयासों का विकास एवं संवर्द्धन तथा अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित कुछ मामले आदि शामिल हैं। इन समुदायों के क्षेत्रीय कार्यक्रम एवं विकास, नीति, आयोजना, निगरानी, मूल्यांकन आदि के समन्वय की जिम्मेदारी संबंधित केन्द्रीय मंत्रालय/विभाग, राज्य सरकारें तथा संघ राज्य क्षेत्र प्रशासनों की है। इस क्षेत्र से संबंधित प्रत्येक केंन्द्रीय मंत्रालय/विभाग आदि नोडल मंत्रालय है। इन समुदायों के समग्र विकास हेतु जनजातीय कार्य मंत्रालय राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों प्रशासनों तथा विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों/विभागों के प्रयासों का समर्थन एवं आपूर्ति करता है।


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