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गैर-सरकारी संगठन/सार्वजनिक सहकारिता

सार्वजनिक सहकारिता का मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवी संगठनों (वीओ), गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के प्रयासों से तथा सामाजिक-आर्थिक उत्थान हेतु एक वातावरण उपलब्ध कर एंव अनुसूचित जनजातियों के संपूर्ण विकास के माध्यम से सरकार की कल्याण योजनाओं को बढ़ावा देना और शिक्षा, स्वास्थ्य एंव स्वच्छता, पीने का पानी, कृषि-उद्यान उत्पादकता एंव आदिवासी संस्कृति का संरक्षण, सुरक्षा एवं बढ़ावा देने आदि हेतु आदिवासी क्षेत्रों में सेवा की कमियों को पूरा करना है। कोई अन्य नया कार्य या नई गतिविधि जो सामाजिक-आर्थिक उत्थान या अनुसूचित जनजाति की जीविका पीढ़ी को सीधे प्रभावित करती हो उससे भी वीओ/एनजीओ/ सार्वजनिक निकायों के माध्यम से साझेदारी कर सकते है।

सुदूर एवं दूर दराज आदिवासी क्षेत्रों में सेवा को पहुँचाने के मुख्य उद्देश्य के बावजूद यह भी जरूरी है कि प्रदान की जा रही इन सेवाओं के मानक का भी नियमित अंतराल में परीक्षण किया जाए। इसलिए प्रत्येक वीओ/एनजीओ/सार्वजनिक निकाय के प्रत्येक भागीदारी से गुणवत्ता सेवाओं के वितरण की दिशा में प्रयास करने की उम्मीद की जाती है।

मंत्रालय, आदिवासी के विकास एंव कल्याण हेतु स्वयंसेवी प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए वीओ/एनजीओ/सार्वजनिक निकाय समुदाय-संगठन विशेषकर पारंपरिक आदिवासी संस्थानों (टीटीआई) के साझेदारों की क्षमता विकास में सुविधा देगा।


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